वर्षांत समीक्षा- 2018 : पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

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  • वर्ष 2018 भारत के नेतृत्व और पर्यावरण के मुद्दों पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान – चैंपियंस ऑफ़ द अर्थ अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
  • संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक मंच पर अपने साहसिक पर्यावरण कार्य के लिए नीति नेतृत्व श्रेणी में प्रधानमंत्री को मान्यता दी।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर सहयोग की स्थापना में उनके अग्रणी कार्य ने देश को सौर ऊर्जा की शक्ति का लाभ उठाते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राष्ट्रों के बीच एक वैश्विक गठबंधन की शुरुआत की, जिसकी विश्व स्तर पर प्रशंसा हुई है।
  • वर्ष 2018 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की कुछ प्रमुख उपलब्धियां नीचे दी गई हैं: –
  • विश्व पर्यावरण दिवस:
  • पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन क्षेत्रों में भारत के वैश्विक नेतृत्व को ध्यान में रखते हुए, यूएनईपी ने 5 जून, 2018 को भारत को विश्व पर्यावरण दिवस (डब्ल्यूईडी) के लिए वैश्विक मेजबान देश के रूप में चुना था।
  • मुख्य कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित किया गया था।
  • विश्व पर्यावरण दिवस, 2018 प्लास्टिक प्रदूषण” पर केंद्रित था जो आज की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है।
  • राज्यों / केन्द्रशासित प्रदेशों में इको-क्लबों के माध्यम से एकल-उपयोग प्लास्टिक प्रदूषण पर कार्य किया जा रहा था।
  • इसके तहत जो मुख्य कार्य किए जा रहे थे-चिन्हित किए गए समुद्र-तटों और नदियों के किनारे की सफाई एवं 3 जून, 2018 को मिनी मैराथन का आयोजन शामिल है।
  • इको-क्लब कार्यक्रम को लागू करने के लिए संबंधित राज्यों की नोडल एजेंसियों के परामर्श करने के बाद, 14 मई, 2018 को गोवा में एक बड़े समारोह के साथ इसकी शुरूआत की गई, जिसके तहत सफाई अभियान के लिए 24 समुद्र तटों और 24 नदी खंडों की पहचान की गई थी।
  • इस अभियान में विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों ने भाग लिया।
  • विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, वाद-विवाद, जागरूकता रैलियां आदि का आयोजन किया गया।
  • उपरोक्त स्वच्छता अभियान के अलावा, प्लास्टिक के उचित उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए 3 जून, 2018 को विनय मार्ग, नई दिल्ली में मिनी मैराथन आयोजित किया गया था।
  • इस मैराथन में दिल्ली-एनसीआर के लगभग 10,000 इको-क्लब के छात्रों ने भाग लिया।
  • पांच प्रमुख शहरों बंगलोर, अहमदाबाद, गंगटोक, भोपाल और भुवनेश्वर में भी मिनी-मैराथन आयोजित किया गया था।
  • ग्रीन गुड डीड्स अभियान:-
  • केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, डॉ. हर्षवर्धन द्वारा पर्यावरण की रक्षा और देश में अच्छे जीवन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए सामाजिक आंदोलन, ग्रीन गुड डीड्स ने विश्व भर में प्रशंसा अर्जित की है।
  • ग्रीन गुड डीड्स आम लोगों के जीवन में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने और उन्हें शामिल करने का एक अच्छा प्रयास है।
  • औपचारिक रूप से जनवरी, 2018 में शुरू किया गए, इस अभियान के द्वारा पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए व्यक्तियों या संगठनों द्वारा किए गए छोटे सकारात्मक कार्यों को आगे बढ़ाना है।
  • मंत्रालय ने 600 से अधिक ग्रीन गुड डीड्स की सूची तैयार की है और लोगों से कहा है कि वे अपने ग्रीन सामाजिक उत्तरदायित्व को पूरा करने के लिए अपने व्यवहार को ग्रीन गुड व्यवहार में बदल दें।
  • पर्यावरण संरक्षण को मजबूती प्रदान करने के लिए व्यक्तियों या संगठनों द्वारा किए जाने वाले इन छोटे, सकारात्मक कार्यों को डॉ हर्षवर्धन ऐप नामक मोबाइल ऐप पर सूचीबद्ध किया गया है।
  • भारत के आमलोगों के बीच ग्रीन गुड डीड्स के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अमिताभ बच्चन के साथ उच्च स्तरीय ऑडियो-वीडियो (2 वीडियो-जीजीडी प्ले और जीजीडी मोंटाज+ 3 ऑडियो जिंग्लस-नो प्लास्टिक, वायु प्रदूषण और जल संरक्षण) तैयार किया है।
  • इसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कई मीडिया प्लेटफार्मों जैसे टीवी न्यूज चैनलों, डिजिटल सिनेमा, एफएम चैनलों, दूरदर्शन, लोकसभा टीवी और राज्यसभा टीवी के माध्यम से जारी भी किया है।
  • इको-क्लब के तहत छात्र ग्रीन गुड डीड्स (जीजीडी) पहल को लागू कर रहे हैं, जो लोगों के व्यवहार को ग्रीन गुड व्यवहार में बदलने और ग्रीन सामाजिक दायित्व को पूरा करने का प्रयास करता है।
  • राज्य / केंद्रशासित प्रदेशों में नोडल एजेंसियों के माध्यम से ग्रीन गुड डीड्स को लागू करने के लिए एक दस सूत्रीय एजेंडा विकसित किया गया है, जो इको-क्लब कार्यक्रम को लागू कर रहा है।
  • जीजीडी के तहत पूरे देश में छात्रों द्वारा कई गतिविधियों जैसे स्कूल कैंपस के अंदर सफाई अभियान, अपशिष्ट का बायो–डिग्रेडेबल एवं नन-बायोडिग्रेडेबल में पृथक्करण, पेपर का फिर से इस्तेमाल और वृक्षारोपण आदि कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
  • उनके कार्यों से ग्रीन (हरित) के प्रति कार्यकुशलता दिखाई दे रहा है।
  • इसके अलावा ग्रीन गुड डीड्स कार्यक्रम का आयोजन 6 अक्टूबर, 2018 को इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) 2018 में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
  • इस कार्यक्रम का उद्घाटन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अपर सचिव डॉ ए. के. मेहता ने किया था।
  • इको-क्लब कार्यक्रम के तहत सफलता कहानियों को प्रदर्शित करते हुए प्रदर्शनी लगाई गई थी।
  • उत्तर प्रदेश से करीब 200 इको-क्लब के छात्रों ने ड्राइंग और निबंध प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
  • स्वच्छ वायु अभियान:
  • केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने 10 से 23 फरवरी 2018 तक दिल्ली में स्वच्छ वायु के लिए दिल्ली सरकार, एनडीएमसी, सीपीसीबी और अन्य नगर एजेंसियों के साथ मिलकर संयुक्त कार्यक्रम की शुरूआत की।
  • इस अभियान का उद्देश्य जमीनी स्तर के अधिकारियों और आम जनता को पर्यावरण संरक्षण की आदत के प्रति जवाबदेह बनाना है।
  • इसके लिए 66 टीमों का गठन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक अधिकारी और दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के संयुक्त नेतृत्व में किया गया था।
  • इन अधिकारियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और संबंधित नगर निगमों के अधिकारियों द्वारा सहायता भी प्रदान किया गया।
  • टीमों को प्रदूषण रोकने की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए चेक लिस्ट भी प्रदान किया गया, जिसमें धूल के शमन (रोक), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और कचरा जलाने से रोकने के प्रभावी उपाय शामिल हैं।
  • इस अभियान की सफलता को ध्यान में रखते हुए, नवंबर 2018 में 10 दिनों के लिए दूसरा दौर भी आयोजित किया गया था।
  • हरित कौशल विकास कार्यक्रम (जीएसडीपी)
  • पर्यावरण, वन और वन्यजीव क्षेत्रों में युवाओं को कौशल प्रदान करने और उन्हें रोजगारपरक / स्वरोजगार में सक्षम बनाने के लिए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जून, 2017 में पायलट आधार पर हरित कौशल विकास कार्यक्रम (जीएसडीपी) शुरू किया।
  • वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान 30 से अधिक कौशल आधारित कार्यक्रमों जैसे प्रदूषण निगरानी (वायु/ जल / मिट्टी), एसटीपी / ईटीपी / सीईटीपी संचालन, अपशिष्ट प्रबंधन, वन प्रबंधन, जल बजट और लेखा परीक्षा, नदियों में पाए जाने वाले डॉल्फिन का संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण, पीबीआर, मैंग्रोव संरक्षण, बांस प्रबंधन और आजीविका उत्पादन पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है।
  • वर्ष 2018-19 के दौरान, अगस्त से अभी तक, 944 छात्रों ने अलग-अलग कौशल पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
  • वर्तमान में, 568 उम्मीदवार विभिन्न चल रहे पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं।
  • वर्ष 2018-19 के दौरान मास्टर ट्रेनर्स का भी एक पूल बनाने का उद्देश्य पूरा हो रहा है, सफल प्रशिक्षुओं में से 283 ने मास्टर ट्रेनर बन गए हैं, जो पर्यावरण, वन और वन्य जीवन से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में देश भर में अधिक युवाओं को कौशल प्रदान करेंगे।
  • जीएसडीपी के तहत किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी देने वाले एक मोबाइल ऐप, इन कार्यक्रमों की पेशकश करने वाले संस्थानों की सूची और अन्य विवरण भी शुरू किया गया है।
  • ग्रीन (हरित) दीवाली
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 22 अक्टूबर 2018 को “हरित दीवाली-स्वस्थ दीवाली” अभियान का शुरूआत की जिसमें दिल्ली/एनसीआर के करीब 500 स्कूली छात्रों ने भाग लिया।
  • पर्यावरण-अनुकूल दीवाली मनाने के लिए इको-क्लब कार्यक्रम को लागू करने वाली नोडल एजेंसियों के लिए एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें घरों की सफाई, घरों को पुनर्निर्मित करना और दीयों से सजावट करना, मोमबत्तियाँ जलाना, दीप जलाना; जरूरतमंदों को कपड़े / किताबें दान करना; रंगोली बनाना आदि शामिल है।
  • बांस का पुनर्वर्गीकरण और वृक्ष की श्रेणी से हटाना:
  • भारत सरकार ने 1290 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ नए पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन को शुरू करके बड़े पैमाने पर बांस के वृक्षारोपण का समर्थन एवं विनियामक प्रावधान को सक्षम कर बांस की खेती को बढ़ावा देने हेतु ठोस प्रयास किए हैं।
  • भारतीय वन अधिनियम, 1927 में संशोधन से बांस के अंतर-राज्य वहन में सुविधा होगी, क्योंकि एक राज्य से दूसरे राज्य में पारगमन के दौरान परमिट की आवश्यकता नहीं होगी।
  • जलवायु परिवर्तन:
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के जलवायु परिवर्तन प्रभाग जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों, अंतरराष्ट्रीय वार्ता और घरेलू नीतियों एवं कार्यों को भी देखता है।
  • भारत जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी), पेरिस समझौते और क्योटो प्रोटोकॉल के लिए एक पार्टी भी है।
  • यह प्रभाग यूएनएफसीसीसी को राष्ट्रीय संचार (नैटकॉम) और द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (बीयूआर) प्रस्तुत करने के लिए भी जिम्मेदार है।
  • कुछ और भी पहल जैसे जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी), जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय अनुकूलन कोष (एनएएफसीसी),जलवायु परिवर्तन एक्शन कार्यक्रम (सीसीएपी) और जलवायु परिवर्तन पर राज्यों द्वारा संचालित योजनाएं (एसएपीसीसी) आदि हैं।
  • वर्ष 2018 के दौरान, जलवायु परिवर्तन पर कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें और वार्ताएं यूएनएफसीसीसी (सीओपी -24) की पार्टियों के 24 वें सम्मेलन के लिए आयोजित की गईं, जिसमें माननीय मंत्री, ईएफ एंड सीसी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
  • मंत्रालय ने 19 और 20 नवंबर, 2018 को समान विचार वाले विकासशील देशों (एलएमडीसी) और 1 एवं 2 नवंबर, 2018 को बेसिक (ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन) देशों की अंतरराष्ट्रीय बैठकों की मेजबानी की।
  • इस बैठक के माध्यम से विकासशील देशों की रुचि और स्थिति को सीओपी -24 से लेकर यूएनएफसीसीसी तक ले जाने में मजबूती प्रदान की है।
  • पोलैंड के कोटविस में आयोजित पार्टियों के 24वें सम्मेलन (सीओपी-24) पेरिस समझौता कार्य योजना को अपनाने में सफल रहा।
  • यह सम्मेलन बहुत ही महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसमें 2018 फेसिलेटिव तलानोआ डायलॉग के समापन और 2020 से पहले की कार्रवाई के कार्यान्वयन एवं महत्वाकांक्षा सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
  • 3 दिसंबर से 14 दिसंबर, 2018 तक पोलैंड के कटोविस में आयोजित यूएनएफसीसीसी के चौबीसवें सम्मेलन के दौरान भारत का एक मंडप (पवेलियन) भी तैयार किया गया था।
  • इस वर्ष पवेलियन का थीम एक विश्व एक सूर्य एक ग्रीड था, जो अक्टूबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय सौर सम्मेलन की पहली सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर आधारित था कि 2030 तक इसकी 40 प्रतिशत स्थापित बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन से होगी।
  • अन्य प्रतिभागी देशों जापान, कतर, ऑस्ट्रिया, मालद्वीप, यूके और मेजबान देश पोलैंड ने प्रतिष्ठित गणमान्य लोगों ने भारत के पवेलियन का दौरा किया तथा उल्लेखनीय प्रतिक्रिया दी।
  • इंडिया पवेलियन 20 विभिन्न घटनाओं के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में किए गए जलवायु परिवर्तन कार्रवाई को प्रदर्शित करने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों / विभागों, थिंक टैंक, सिविल सोसायटी संगठनों सहित 43 विभिन्न हितधारक संस्थानों को एक साथ लाने का मंच भी बन गया।
  • वर्ष 2018 में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय अनुकूलन कोष (एनएएफसीसी) के तहत, राजस्थान, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, मिजोरम, मणिपुर और केरल में अनुकूलन गतिविधियों का समर्थन करने के लिए चल रही सात परियोजनाओं के लिए कुल 42.16 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।
  • अब तक 27 परियोजनाएं (एक क्षेत्रीय परियोजना सहित) कुल 673.63 करोड़ की लागत से स्वीकृत की गई हैं और इसके लिए 369 करोड़ रुपये मंजूर भी किए गए हैं।
  • जलवायु परिवर्तन एक्शन कार्यक्रम (सीसीएपी) योजना के तहत मध्य प्रदेश, नागालैंड, तेलंगाना और तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में दो प्रदर्शन परियोजनाओं के क्षमता निर्माण के लिए कुल 2.15 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
  • मंत्रालय सीसीएपी के तहत दो वैज्ञानिक कार्यक्रमों- राष्ट्रीय कार्बोनेस एयरोसोल कार्यक्रम (एनसीएपी) और दीर्घकालिक पारिस्थितिक वेधशालाएं (एलटीईओ) को भी लागू कर रहा है।
  • भारत सम्मेलन के तहत दायित्वों का पालन करने के लिए दिसंबर 2018 के अंत में अपनी दूसरी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (बीयूआर) यूएनएफसीसीसी को प्रस्तुत करेगा।
  • इस रिपोर्ट में वर्ष 2014 की राष्ट्रीय जीएचजी सूची की जानकारी भी शामिल है।
  • 2018 के दौरान के कुछ अन्य महत्वपूर्ण पहल / नीतिगत निर्णय
  • नदियों के पर्यावरण संबंधी प्रदूषण, जिसमें स्पिरिंग-फेड नदियाँ भी शामिल हैं और पारिस्थितिकी पर इसके प्रभाव से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की बैठक संपन्न हुआ।
  • प्रथम भारत- मोरक्को संयुक्त कार्य समूह की बैठक फरवरी, 2018 में पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग के लिए विभिन्न क्षेत्रों का पता लगाने हेतु आयोजित की गई थी।
  • भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन पर एक नई भारत-जर्मनी तकनीकी सहयोग परियोजना की अवधारणा की गई थी।
  • परियोजना को आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय द्वारा कमीशन किया गया है और इसे एमओई एंड सीसी द्वारा कार्यान्वित भी किया जा रहा है।
  • 6 अप्रैल, 2018 को जारी अधिसूचना के अनुसार ईआईए अधिसूचना 1994 के तहत ईसी को दी गई सभी खनन परियोजना के लिए छह महीने का अवसर था, लेकिन माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में विस्तार / आधुनिकीकरण / संशोधन के लिए ईसी प्राप्त नहीं हुआ।
  • अरावली क्षेत्र के सभी खनिजों (मेजर और माइनर) के लिए खान के पट्टे के आकार के बावजूद पहले ही पर्यावरण क्लीयरेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के तहत, 94.66 करोड़ रूपए व्यय के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
  • भूमि संबंधी एजेंसियों, संबंधित राज्य सरकारों के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत वनों के बाहर वृक्षों के आवरण को बढ़ाने के लिए एक रणनीति अपनाने हेतु कैबिनेट नोट जारी किया गया और गैर-सरकारी वन भूमि पर वृक्षारोपण के लिए सार्वजनिक और निजी संगठनों को परामर्श के लिए मसौदा तैयार किया गया और उसे विचार के लिए भेज दिया गया है।
  • अवमानित वन के वनीकरण में सार्वजनिक भागीदारी हेतु दिशा-निर्देश के लिए कैबिनेट नोट परामर्श हेतु भेज दिया गया है।
  • पर्यावरण के क्षेत्रों में सहयोग पर भारत सरकार के एमओईएफ एंड सीसी, और साइप्रस गणराज्य के कृषि, ग्रामीण विकास और पर्यावरण मंत्रालय, के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
  • मध्य एशियाई फ्लाईवे की राष्ट्रीय कार्य योजना, दुनिया के नौ फ्लाईवे में से एक है, जिसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है, जो प्रवासी पक्षियों, जुड़े वेटलैंड्स और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े प्रभावी प्रबंधन को बनाने में सक्षम करेगा।
  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (एससीएनबीडब्ल्यूएल) की लागत, समय और गतिविधियों को व्यवस्थित बनाने के लिए, वन्यजीव प्रभाग ने एससीएनबीडब्ल्यूएल से संबंधित सभी मुद्दों की वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग शुरू की है। इसके परिणामस्वरूप वन्य जीवों के लिए राष्ट्रीय बोर्ड की स्थायी समिति से संबंधित मुद्दों पर तुरंत रोक लगा दी गई है।
  • वन्यजीव रोग प्रबंधन में पशु चिकित्सा डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने के लिए, मंत्रालय ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली, उत्तर प्रदेश में वन्यजीव रोग प्रबंधन में देश के पशु चिकित्सकों के लिए एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किया है।
  • दिल्ली-एनसीआर में विशेष रूप से उत्तर भारत में शुरुआती सर्दियों में प्रतिकूल मौसम की स्थिति के दौरान फसल के अवशेषों को जलाने से उच्च स्तर का वायु प्रदूषण हो सकता है, इसके लिए केंद्र सरकार ने इन-सिटू के लिए कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ावापर एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना को मंजूरी दी है, 1151.80 करोड़ रूपए के परिव्यय के साथ 2018-19 और 2019-20 की अवधि के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और एनसीटी-दिल्ली सहित राज्यों में फसल अवशेष का प्रबंधन की यह योजना है।
  • इस वर्ष 591.65 करोड़ रूपए के केंद्रीय निधियों का आवंटन दिल्ली को छोड़कर संबंधित राज्यों को जारी कर दिया गया है।
  • एक वेब-आधारित पोर्टल वर्तमान में शहरों के लिए वास्तविक समय एक्यूआई, वायु गुणवत्ता स्थिति, से जुड़े संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी प्रदान करता है।
  • वायु गुणवत्ता बुलेटिन भी दैनिक आधार पर जारी किए जाते हैं।
  • केंद्र सरकार ने 12 जनवरी 2017 को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए एक ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी)) अधिसूचित किया था, जिसमें दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध; निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध, निजी वाहनों के लिए सम एवं विषम योजना, स्कूलों को बंद करना, ईंट-भट्टों को बंद करना, हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर को बंद करना; डीजल जनरेटर सेट पर प्रतिबंध, लैंडफिल में कचरा जलाना और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को रोकना आदि जैसे उपाय शामिल हैं।
  • संबंधित अधिकारियों द्वारा गहन विचार-विमर्श के बाद किए जाने वाले उपायों की प्रकृति, कार्यक्षेत्र और कठोरता को प्रदूषण के स्तर से अधिक गंभीर या आपातकालीन, गंभीर, बहुत खराब, मध्यम से सामान्य और मध्यम स्तर पर रखा गया है। यह कार्रवाई पूरे एनसीआर में लागू किया जाना है।
  • दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 42/31 उपायों के कार्यान्वयन के लिए वायु (रोकथाम और प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1986 की धारा 18 (1) (बी) के तहत वाहनों के उत्सर्जन से संबंधित नियंत्रण और शमन उपाय, सड़क की धूल और अन्य उत्सर्जन, जैव-द्रव्यमान / नगरपालिका ठोस अपशिष्ट जलाना, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और विध्वंस गतिविधियों, और अन्य सामान्य कदम के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
  • पालतू जानवरों की दुकानों को जवाबदेह बनाने और वहां जानवरों के लिए होने वाली क्रूरता को रोकने के लिए पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पेट शॉप) नियम, 2018 की अधिसूचना जारी की गई।
  • वित्तीय वर्ष 2018-19 में वेटलैंड्स और झीलों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए एनपीसीए योजना के तहत 66 करोड़ रूपए की धनराशि रखी गई है।
  • 4 राज्यों में 5 झीलों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए कुल 34.22 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं और 12 राज्यों और 1 यूटी में 35 वेटलैंड (आर्द्रभूमि) के लिए 27.344 करोड़ रूपए, 1 जनवरी, 2018 से 31 दिसंबर, 2018 के समय-सीमा के दौरान आवंटित किए गए हैं।
  • इसके अलावा, एनपीसीए के तहत वेटलैंड्स और झीलों के संरक्षण एवं प्रबंधन से संबंधित अनुसंधान और विकास तथा अन्य गतिविधियों के लिए 41.086 लाख रूपए की राशि आवंटित की गई है।
  • डब्ल्यूसीसीबी को यूएनईपी अवार्ड मिला: डब्ल्यूसीसीबी द्वारा ट्रांस-बॉर्डर पर्यावरणीय अपराध का मुकाबला करने में किए गए उत्कृष्ट कार्य को यूनाइटेड नेशन एनवायरनमेंट प्रोग्राम (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) द्वारा एशिया पर्यावरण प्रवर्तन पुरस्कार, 2018 से सम्मानित किया गया है।
  • एशिया पर्यावरण प्रवर्तन पुरस्कार सरकारी अधिकारियों द्वारा प्रवर्तन में उत्कृष्टता के क्षेत्र में सार्वजनिक संस्थानों / टीमों ने एशिया में सीमा-पार पर्यावरणीय अपराध का मुकाबला करने हेतु दिया जाता है।
  • डब्ल्यूसीसीबी को इनोवेशन श्रेणी में यह पुरस्कार दिया गया है।
  • डब्ल्यूसीसीबी ने अभिनव प्रवर्तन तकनीकों को अपनाया है, जिन्होंने भारत में ट्रांस-बॉर्डर पर्यावरणीय अपराधों के नाटकीय रूप से प्रवर्तन को बढ़ाया है।
  • उल्लेखनीय रूप से इसने भारत में वन्यजीव अपराधों को रोकने और उनका पता लगाने के लिए अपराध में रुझानों का विश्लेषण करने और प्रभावी उपायों को विकसित करने में मदद करने के लिए वास्तविक समय सीमा में डेटा प्राप्त करने के लिए एक ऑनलाइन वाइल्डलाइफ क्राइम डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया है।

 

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