वर्षांत समीक्षा – 2017 : रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय

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  • नई यूरिया नीति-2015 को 25 मई, 2015 को अधिसूचित किया गया था।
  • वर्ष 2016-17 के दौरान 242.01 एलएमटी यूरिया का उत्पादन हुआ, जो वर्ष 2012-13 में उत्पादित 225.75 एलएमटी और वर्ष 2013-14 में उत्पादित 227.15 एलएमटी की तुलना में काफी अधिक है।
  • शत-प्रतिशत यूरिया का नीम कोटेट उत्पादन 25 मई, 2015 को अनिवार्य कर दिया गया।
  • सरकार ने 50 किलो की मौजूदा बोरी के स्थान पर 45 किलो की यूरिया बोरी का चलन शुरू करने का निर्णय लिया है।
  • मैटिक्स फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (मैटिक्स) ने पश्चिम बंगाल स्थित पानागढ़ में एक सीबीएम आधारित नया अमोनिया-यूरिया परिसर स्थापित किया है, जिसकी वार्षिक स्थापित क्षमता 1.3 एमएमटी है।
  • मैटिक्स का वाणिज्यिक उत्पादन 1 अक्टूबर, 2017 को शुरू हो गया है।
  • गोरखपुर, सिन्दरी और बरौनी इकाइयों की तीनों परियोजनाओं में अक्टूबर, 2020 तक उत्पादन शुरू होने की आशा है।
  • उर्वरक सब्सिडी योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना और किसानों के लिए इसके अपेक्षित लाभ :-
  • अनुमानित 19 जिलों में से 17 जिलों में पायलट परियोजना लागू की गई है।
  • शेष दो जिलों में पीओएस मशीनें लगाने और खुदरा विक्रेताओं को प्रशिक्षित करने के कार्य जारी हैं।
  • विभाग ने उर्वरक योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) को देश भर में लागू करने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की है, जो राज्य सरकारों की तैयारियों और उर्वरक कंपनियों द्वारा पीओएस मशीनों को लगाये जाने पर आधारित है।
  • विभिन्न राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को 1 सितंबर, 2017 से गो-लाइव मोड में डाल दिया गया है।
  • 1 जनवरी, 2017 से लेकर 18 दिसम्बर, 2017 तक की अवधि के दौरान 3019 प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) केन्द्र चालू कर दिए गए हैं।
  • एनपीपीए ने जनवरी, 2017 से लेकर नवंबर, 2017 तक की अवधि के दौरान 255 फॉर्मूलेशंस के अधिकतम मूल्य तय किए हैं जिससे एनएलईएम 2015 के तहत मूल्य नियंत्रण के दायरे में कुल मिलाकर 849 फॉर्मूलेशंस आ गए हैं।
  • एनपीपीए ने देश की आम जनता के हित में 28 अगस्त, 2016 को अपना मोबाइल एप फार्मा सही दामलांच किया है, जिसके जरिये कोई भी व्यक्ति अत्यन्त आसानी से किसी फॉर्मूलेशन के ब्रांड नाम, संघटक, अधिकतम मूल्य और एमआरपी को सर्च कर सकता है।
  • केन्द्र सरकार, अखिल असम छात्र संघ (आसू) और अखिल असम गण संग्राम परिषद (एएजीपी) के बीच हस्ताक्षरित सहमति पत्र को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त, 1985 को असम गैस क्रैकर परियोजना पर पहल की गई, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास करना है।
  • 2 जनवरी, 2016 को इस परियोजना की शुरुआत की गई और 5 फरवरी, 2016 को डिब्रूगढ़ के लेपेतकाता स्थित बीसीपीएल परिसर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया।
  • भारत सरकार/सीसीईए ने 17 मई, 2017 को हिन्दुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स लिमिटेड (एचओसीएल) की पुनर्गठन योजना को मंजूरी दी है, जिसमें डाई-नाइट्रोजन टेट्रोऑक्साइड (एन2ओ4) संयंत्र को छोड़कर एचओसीएल की रसायनी यूनिट के समस्त गैर-लाभप्रद संयंत्रों के परिचालनों को बंद करना शामिल है।
  • एन24 संयंत्र को जैसा भी है, जहां भी हैके आधार पर इसरो को स्थानांतरित करना तय किया गया।
  • एन2ओ4 संयंत्र को छोड़कर रसायन यूनिट स्थित सभी संयंत्रों को बन्द कर दिया गया है।
  • एन2ओ4 संयंत्र को 1 अक्टूबर, 2017 को इसरो को हस्तांतरित कर दिया गया है।
  • रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग ने क्लस्टर आधारित विकास की अवधारणा को प्रोत्साहित करने के लिए पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रोरसायन निवेश क्षेत्रों (पीसीपीआईआर) को बढ़ावा देने की नीति अपनाई है।
  • अब तक चार पीसीपीआईआर को मंजूरी दी गई है।
  • सरकार ने केन्द्रीय प्लास्टिक इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिपेट) के 16 नए केन्द्रों की स्थापना को मंजूरी दी है, जिसके साथ ही इन केन्द्रों की कुल संख्या 23 से बढ़कर 39 के स्तर पर पहुंच जाएगी।
  • जनवरी-नवंबर, 2017 के दौरान सिपेट ने लगभग 60,000 लोगों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया है।
  • सिपेट के 36 कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता नीति पर आधारित एनएसक्यूएफ के अनुरूप किया गया है।
  • इससे देश भऱ में एकसमान एवं मानकीकृत कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित होगी।

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